[:hn]पर्यटकों को खूब भा रही हैं चोपता की वादियां[:]

[:hn]बदरीनाथ और केदारनाथ धामों के साथ ही पंच केदारों को जोड़ने वाले ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर मोटर मार्ग और इसके समीप अभी भी तीन फीट बर्फ जमी हुई है। उत्तराखंड के मिनी स्विटरलैंड कहे जाने वाले चोपता में भी पर्यटक आने लगे हैं। यहां प्रतिदिन 15 से अधिक यात्री पहुंचने लगे हैं।[:]

[:hn]बदरीनाथ और केदारनाथ धामों के साथ ही पंच केदारों को जोड़ने वाले ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर मोटर मार्ग और इसके समीप अभी भी तीन फीट बर्फ जमी हुई है। उत्तराखंड के मिनी स्विटरलैंड कहे जाने वाले चोपता में भी पर्यटक आने लगे हैं। यहां प्रतिदिन 15 से अधिक यात्री पहुंचने लगे हैं।
ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर मोटर मार्ग बार-बार बर्फबारी से बंद हो जाता था, लेकिन पर्यटकों की परेशानी को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन ने लोनिवि को इस बार बर्फबारी में भी सड़क को सुचारु रखने के निर्देश दिए थे। इसका परिणाम यह रहा कि मार्ग खुला रहा और बीते फरवरी माह से 15 मार्च तक चोपता क्षेत्र में 355 पर्यटक सैर-सपाटे पर पहुंचे। चोपता में होटल व्यवसायी मनबर सिंह ने कहा कि यहां दूर-दूर तक फैली ढलानों में अभी भी दो से तीन फीट बर्फ जमी है।
चोपता में ट्रैकिंग दल के सदस्य मनोज भंडारी ने बताया कि पर्यटकों की पहली पसंद चोपता ही रहती है। दिल्ली से दोस्तों के साथ चोपता के सैर-सपाटे पर आए कुलभूषण चक्रवर्ती का कहना है कि उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों को विकसित करने की जरूरत है। कई जगहों पर सड़क क्षतिग्रस्त है, जिससे चोपता तक पहुंचने में दिक्कत हुई।
पर्यटक स्थलों में घास और रिंगाल के हट्स बनाए जा रहे हैं। पर्यटकों को पूरी सुविधाएं दी जाएंगी। जिले के ट्रैकिंग रूटों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। वर्ष 2013 की आपदा का पर्यटकों में कोई खौफ नहीं है।[:]